ֆ:2. आईसीएआर से फ्लोरिकल्चर विभाग वैज्ञानिक डॉ. रितु जैन ने बताया कि महिलाएं हमेशा से घर के सौंदर्यीकरण में केंद्रित रहीं हैं। ऐसे में महिला किसानों कि बागवानी में रुचि होना सही विकल्प हो सकता है। महिला किसानों के विकास में फूलों की खेती बड़े पैमाने पर आगे बढ़ने के रास्ते खोल सकती है। महिला किसानों को गुलाब, गेंदा, गुलदाउदी और बौगनविलिया जैसी फसलों पर कार्य करना चाहिए। इससे अच्छा मुनाफा वर्तमान में कई महिला किसान ले रहीं हैं। मैं अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर संदेश देना चाहूंगी कि महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और उद्यमी बने.
§ֆ:3. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में कार्यरत बागवानी विभाग की प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. सबीना इस्लाम ने बताया कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका सभी के लिए प्रेर्णादायी है। ध्यान देने की बात यह है कि जैसे हरित क्रांति में महिला ने अपनी भागीदारी कर क्रांति लाई थी। इसी तरह देश-विदेश की महिलाएं नए-नए आयाम रच रही हैं। इतिहास गवाह है कि अत्यधिक क्षेत्रों की शुरुआत महिलाओं द्वारा हुई है। इसमें अगर हम बात करें कृषि क्षेत्र की तो इसकी शुरुआत भी महिलाओं से ही हुई थी। महिलाओं ने बीज को पौधा बनाकर उत्पाद उगाए हैं। महिलाओं की रुची के साथ ही बागवानी का इजात हुआ है। हम पहले मोटे अनाज पर निर्भर थे, लेकिन अब हमारे पास कई ऐसी सब्जियां मौजूद हैं जिन्हें महिलाओं ने उगाया। मेरा महिलाओं के लिए यही संदेश है कि लैंगिक भेदभाव न करें। समाज में अपने असतित्व को पहचाने और ऊंचाईयों के नए अवसर खोजें।
§ֆ:4. कृषि क्षेत्र में भारतीय महिलाओं का बड़ा बोलबाला है। खेत से लेकर खलीहान तक महिलाएं अहम भूमिका में नजर आती हैं. इस अवसर भारतीय अनुसंधान संस्थान की शाकीय विभाग की वैज्ञानिक डॉ.अर्पिता जैन ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि एक महिला वैज्ञानिक होने के नाते में खेती किसानी करने वाली हर एक महिला की मेहनत को सलाम करती हूं. मैं अपने करियर की बात करूं तो मैं आज भारतीय कृषि अनुसंधान के शाकीय विभाग में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर कार्यभार संभाल रही हूं। मैंने बीएससी, पश्चिम बंगाल के एक संस्थान से की है। इसके बाद हमने पोस्ट गेर्जुएशन जैनिटिक्स एंड प्लांट बरिडिंग में यूनिर्वसिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंस बेंगलुरू से की है। पौधे के प्रजनन को देखना मेरा मुख्य कार्य है। अभी में विशेष तौर पर मिर्च पर कार्य कर रही हूं। किसानों के लिए के लिए हम भिन्न प्रकार की नई वेराइटी लेकर आते हैं। जिसका इस्तेमाल आज कई किसान कर भी रहे हैं। महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मैं यहीं कहना चाहूंगी कि वो कृषि क्षेत्र में आने वाली नई तकनीकों को समझे उन्हें सीखें और उनका इस्तेमाल अपनी खेती में करें। आज महिलाएं सश्कत और कामयाब होगी तभी हमारे देश का नाम बुलंदियों पर होगा। §1. वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर कई महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी भागीदारी दिखाई है. इसी कड़ी में भारतीय अनुसंधान संस्थान की शाकीय विभाग प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. मनीशा मंगल ने बताया कि महिलाएं हर क्षेत्र में कार्यरत हैं. आज की नारी जैव प्रौद्योगिकी में अहम भागीदारी निभा रहीं हैं. इतना ही नहीं, कृषि उद्यमिता के साथ नई किस्मों में हम कीट विरोधी क्षमता, रोक निरोधक, बॉयो फर्टीफाइड, उत्तम पोषण तत्वों की मात्रा को बढ़ा रहे हैं. वैश्विक से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं ने खुद को साबित किया है. उदाहरण के तौर पर आप कोविड महामारी के दौरान पहली स्वदेशी कोविड वैक्सीन बनाने वाली कंपनी की सह-संस्थापक के साथ वैश्विक स्तर पर ब्रिटिश की महिला वैज्ञानिक को देख सकते हैं, जिन्होंने डीएनए पर रिसर्च कर उसे डबल हेलीकल स्ट्रक्चर बताया था. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर मैं सभी महिलाओं से कहना चाहूंगी कि आप धैर्य शक्ति और साहस का प्रतीक हैं. आपको सशक्त बनना है, आत्मनिर्भर बनना है और आपको अपने अधिकारों के बारे में जागरूक होना है. हर दिन आपका है. आप अपने लक्ष्य के प्रति अग्रसर रहें. सशक्त बनें और मैं मानती हूं की नारी शक्ति ही श्रृष्टी की आधारशीला है. तो मैं चाहती हूं कि आप अपने धैर्य से, अपने आत्मविश्वास से नए आयामों को नए पायदानों को हासिल करें.

