֍:मिट्टी की सेहत में सुधार§ֆ:सर्कुलर डेयरी कार्यक्रम के माध्यम से सरकार जलवायु-समार्ट डेयरी गांव बनाने और देशभर में स्केलेबल और टिकाऊ खेती के तरीको को तैयारय करना है. एनडीडीबी और सस्टेन प्लस को अगले चार सालों में 15 राज्यों में लगाए जान वाले 10 हजार बायोगैस डाइजेस्ट से सालाना 3 लाख टन जैविक घोल बनने की उम्मीद है. इस घोल से मिट्टी का सुधार तो होगा ही साथ ही रसायनिक खादों की जरूरत में कमी आएगी. ये प्लांट्स हर साल 7 मिलियन क्लूबिक मीटर से ज्यादा बायोगैस तैयार करेंग, जिससे गांव में रहने वाले 10 हजार परिवारों को खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन मिल सकेगा.§֍:2021 से साथ हैं NDDB और SUSTAIN PLUS§ֆ:एनजीओ सस्टेन प्लस के डायरेक्टर गणेल नीलम ने कहा कि साल 2021 से ही एनडीडीबी के साथ हमारी साझेदारी ने ‘गोबर अर्थव्यवस्था’ को मजबूत किया है. साथ ही इसका विस्तार करके डेयरी बैल्यू चेन को एकीकृत करने की क्षमता का निर्माण करके दिखाया है. नीलम ने कहा कि NDDB के साथ हमारा नए प्रोजेक्टि का उद्देश्य डेयरी किसानों, खासकर महिलाओं को भोजन बनाने के लिए स्वच्छ ईंधन और मिट्टी को समृद्ध करने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर बायो-स्लरी (घोल) बनाने के लिए पहुंच प्रदान करना और सशक्त बनाना है. उन्होंेने कहा कि हमने 15 राज्यों में 26 से ज्याोदा दूध संघों के साथ समझौता ज्ञापनों साइन किए हैं. §राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और बैंगलोर के एक नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन ‘सस्टेन प्लस’ ने मिलकर एक बड़ी घोषणा की है. दोनों एक साथ मिलकर सर्कुलर डेयरी कार्यक्रम शुरु करने जा रहे हैं. इसमें दोनों उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश और बिहार के साथ 15 राज्यों में 10 हजार बायोगैस प्लांट लगाएंगे. इस कार्यक्रम का शुभारंभ पशुपालन और डेयरी विभाग की ओर से नई दिल्ल में आयोजित ‘डेयरी क्षेत्र में स्थिरता और परिपत्रता पर कार्यशाला’ में किया गया.

