֍:इन बातों का रखें ध्यान§ֆ:मूंग की खेती में सिंचाई का ध्यान रखना आवश्यक है. मूंग की खेती में ज्यादा उर्वरक की आवश्यकता नहीं होती और यह 65-70 दिनों में तैयार हो जाती है. वहीं, इसकी खेती के लिए 4-4.5 किलो बीज प्रति बीघा के लिए पर्याप्त होते हैं. इसकी बुवाई करने के लिए सबसे पहले किसानों को पर्याप्त नमी में जुताई करनी होती है. इसमें ध्यान रखने की बात है कि फसल पक जाने से 15 दिन पहले सिंचाई बंद करनी होती है.§֍:इन खादों से मिलता है बढ़िया उत्पादन§ֆ:किसानों को मूंग की बुवाई से पहले बीज को राइजोबियम कल्चर से उपचारित कर लेना चाहिए. इसके बाद बीज को तैयार कर खेत में 5-6 सेंटीमीटर गहराई पर बुवाई करनी चाहिए. बता दें कि उपचारित बीज की बुवाई करने से बंपर पैदावार मिलती है. साथ ही इसकी खेती में रोग न लगे इसके लिए किसानों को फिनोल फास का इस्तेमाल करना चाहिए. बात करें मूंग की खेती में खाद इस्तेमाल कि तो इसमें फास्फोरस वाले उर्वरकों का ही ज्यादा उपयोग होता है. साथ ही एक बीघा में लगभग 15 किलो फास्फोरस, 10 किलो पोटाश, 8-10 किलो गंधक का प्रयोग करें. इसी के साथ 5 किलो नाइट्रोजन की मात्रा की आवश्यकता होती है. §֍:किस सम करनी चाहिए मूंग की खेती?§ֆ:मूंग की खेती भारत के कुछ राज्यों में प्रमुख रूप से जाती है. इसके खेती किसान खरीफ और जायद दोनों सीजन में अलग-अलग समय पर करते हैं. जायद सीजन में मार्च के प्रथम सप्ताह से अप्रैल तक बुवाई होती है. जबकि खरीफ सीजन में जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के अंतिम सप्ताह तक बुवाई होती है. खेती के दौरान भूमि की दो से तीन बार जुताई करें. उसके बाद ढेलों को कुचलने और खरपतवारों को नष्ट करने के लिए हल्की जुताई करें. मूंग दाल के बीज बोने की विधि में मौसम का भी ध्यान रखना चाहिए. जायद की बुवाई के लिए पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी और पंक्ति की दूरी 30 सेमी रखने की सलाह दी जाती है. साथ ही खरीफ मूंग की खेती के लिए सबसे अच्छा समय जून से जुलाई तक का होता है.§भारत में किसान दालों की खेती बड़े स्तर पर की जाती है. अब सरकार की ओर से भी दलहनी फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है. अब हर साल दाल आयात में वृद्धि होने पर सरकार कई योजनाओं द्वारा किसानों को बढ़ावा दे रही है. बाजार में मूंग दाल की डिमांड काफी ज्यादा है. दलहनी फसलों में मूंग एक महत्वपूर्ण फसल है. मूंग की खेती भारत के कुछ राज्यों में प्रमुख रूप से की जाती है. इस बीच किसान के लिए इसकी खेती बेहतर साबित हो सकती है. बशर्ते खेती सही तरीके से होनी चाहिए. यानी इसकी खेती के समय किसान अगर कुछ चीजों का ध्यान रखें तो बंपर उत्पादन ले सकते हैं.

