֍:उत्तराखंड में नया भू- कानून पास §ֆ:उत्तराखंड में हिमाचल की तर्ज पर भू-कानून लागू करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। जमीनों की अंधाधुंध खरीद-फरोख्त और बदलती डेमोग्राफी की चिंताओं के चलते बीते डेढ़-दो साल से सख्त भू-कानून की मांग काफी जोर पकड़ गई थी। आखिरकार, उत्तराखंड सरकार भू-कानून संशोधन विधेयक लेकर आई, जिसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऐतिहासिक कदम करार दिया है।
§֍:विधेयक में किए गए ये बदलाव §ֆ:उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950) संशोधन विधेयक, 2025 विधानसभा में शुक्रवार को ध्वनिमत से पारित किया गया। इस विधेयक के जरिए सरकार ने मुख्य रूप से 2018 में किए गए संशोधनों को समाप्त कर दिया है। इस तरह उत्तराखंड में फिर से कृषि और उद्यान श्रेणी की जमीन खरीदने के लिए 2018 से पहले की कानूनी स्थिति बन गई है। §ֆ:§֍:सीएम धामी ने कही ये बात §ֆ:विधेयक को विधानसभा से मंजूरी मिलने के बाद, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमने जन भावनाओं के अनुरूप भू-सुधारों की नींव रखी है। देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण संतुलन और आमजन के अधिकारों की रक्षा हेतु सख्त भू-कानून नितांत आवश्यक था। यह अनियंत्रित भूमि खरीद-बिक्री पर रोक लगाएगा और राज्य के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखेगा। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हम उत्तराखंड के संसाधनों, जमीनों को भूमाफियाओं से बचाने को संकल्पित हैं। §उत्तराखंड में नए भू-कानून का विधेयक विधानसभा से पारित हो गया। सख्त भू-कानून के जरिए राज्य सरकार ने हरिद्वार, उधमसिंहनगर को छोड़कर, उत्तराखंड के 11 जिलों में प्रदेश से बाहर के लोगों के लिए कृषि और उद्यान भूमि खरीदने पर रोक लगा दी है। इसके तहत मुख्य तौर पर 2018 में त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के समय किए गए संशोधनों को समाप्त किया गया है।

