֍:प्रोसेस स्टॉक में कोई बदलाव नहीं§ֆ:केंद्र सरकार द्वारा एक बयान जारी किया गया जिसमें बताया कि साल 2024 के रबी सीजऩ में कुल 1132 LMT गेहूं का उत्पादन हुआ और देश में गेहूं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. केंद्र सरकार ने समग्र खाद्य सुरक्षा के प्रबंधन करने और जमाखोरी और बेईमान सट्टेबाजी को रोकने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में व्यापारियों और थोक विक्रेताओं, बड़ी श्रृंखला के खुदरा विक्रेताओं और प्रसंस्करणकर्ताओं पर लागू गेहूं पर स्टॉक लिमिट लगाई हुई है. §֍:केंद्र की ओर से कही ये बात§ֆ:केंद्र ने बयान जारी कर कहा है कि रबी 2024 के दौरान कुल 1132 LMT गेहूं का उत्पादन दर्ज किया गया और देश में गेहूं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. केंद्र सरकार ने समग्र खाद्य सुरक्षा के प्रबंधन करने और जमाखोरी और बेईमान सट्टेबाजी को रोकने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में व्यापारियों और थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, बड़ी श्रृंखला के खुदरा विक्रेताओं और प्रसंस्करणकर्ताओं पर लागू गेहूं पर स्टॉक लिमिट लगाई हुई है. केंद्र सरकार ने गेहूं की कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिशिों के क्रम में 31 मार्च 2025 तक लागू गेहूं स्टॉक लिमिट को संशोधित करने का फैसला लिया है. हालांकि, प्रोसेसर्स की स्टॉकक लिमिट में कोई बदलाव नहीं किया गया है.§֍:पोर्टल पर दें स्टॉक की जानकारी§ֆ:केंद्र सरकार ने कहा है कि सभी गेहूं भंडारण संस्थाओं को गेहूं स्टॉक लिमिट पोर्टल (https://evegoils.nic.in/wsp/login) पर रजिस्ट्रे शन कर हर शुक्रवार को स्टॉक की ताजा स्थिति की जानकारी देनी होगी. अगर कोई संस्था जो पोर्टल पर रजिस्ट्रे शन नहीं कराती है या स्टॉक लिमिट का उल्लंघन करती है तो उसके खिलाफ दंडात्म्क कानूनी कार्रवाई की जाएगी. वहीं, वर्तमान में अगर उपरोक्त संस्थाओं के पास स्टॉक ऊपर बताई गई तय लिमिट से ज्या दा है तो उन्हें नोटिफिकेशन के जारी होने के 15 दिनों के अंदर नई निर्धारित स्टॉक लिमिट तक लाना होगा.§देश में उपभोक्ताओं को गेहूं की अधिक कीमतों से परेशान होना पड़ रहा है. ऐसे में कीमतों को स्थिर करने के लिए सरकार उचित हस्तक्षेप करती है. अभी थोक मंडियों में गेहूं की कीमतें एमएसपी 2275 रुपये प्रति क्विंटल से काफी ऊपर चल रही हैं. ऐसे में आम उपभोक्ताि को इसके लिए और भी ज्याउदा कीमत चुकानी पड़ रही है, जो उनके लिए काफी महंगा है. सरकार ने विभिन्न स्तिरों पर गेहूं के स्टॉीक की लिमिट को घटा दिया है, ताकि इसका अधिक भंडारण होने से कीमतें बढ़े नहीं और महंगाई न बढ़े.

