ֆ:इसी मीटिंग में एक रणनीति पर काम करते हुए साल 2030 तक पीपीआर को देश के अंदर से जड़ से खत्म करने की बात कही गई है. रणनीति पर बोलते हुए सचिव ने कहा कि इस मिशन की मदद से रणनीतिक टीकाकरण, निगरानी, निदान और मजबूत रोग प्रबंधन हस्तक्षेपों के माध्यम से भेड़ और बकरियों को प्रभावित करने वाली एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी पीपीआर को नियंत्रित करने और उन्मूलन करने में भारत के प्रयासों का आकलन करेगा. §֍:ऐसे करें रोकथाम§ֆ:भेड़-बकरियों में पीपीआर रोग की समस्या आमतौर पर देखी जाती है. इसके लिए उनका टीकाकरण काफी जरूरी है. शुरुआती दौर में ही ऐसा करने पर पशु की रोकथाम हो जाती है. इतना ही नहीं पीपीआर के साथ आप एक ही वैक्सीन से पशु को शीप पॉक्स से भी बचा सकते हैं.. जैसे ही भेड़-बकरी में पीपीआर के लक्षण दिखाई दें तो उसे शेड से अलग कर दें. पीडि़त भेड़-बकरी को हेल्दी पशुओं के साथ कभी ना रखें. पीडि़त पशु को पानी खूब पिलाएं. §देश में भारी मात्रा में किसान पशुपालन करते हैं. इसमें भेड़ और बकरी का पालन काफी प्रच्चलित है और इससे अधिक मुनाफा भी होता है. बशर्ते आप पशु को पीपीआर, चेचक जैसे खतरनाक रोगों से बचा सकें. ऐसे में मंत्रालय और वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन ऑफ एनीमल हैल्थ (WOAH) के बीच लगातार मीटिंग हो रही हैं. 17 फरवरी को भी कृषि भवन में WOAH के प्रतिनिधि मंडल के साथ मंत्रालय की सचिव अलका उपाध्याय और दूसरे अफसरों संग एक बार फिर मीटिंग हुई है.

