֍:अंकिता ने बताया लक्ष्य§ֆ:एक न्यूज चैनल से बीतचीत में अंकिता ने बताया कि उन्होंने पांचवीं कक्षा से ही एथिलेटिक्स में करियर बनाने का तय कर लिया था. उनके चार भाई बहनों में वे दूसरे नंबर की हैं. उनका लक्ष्य एशियन और विश्व चैंपियनशिप में प्रतिभाग करना है. अंकिता के पिता किसान हैं. उन्होंने आगे कहा कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा.§֍:स्पोर्ट्स कोटे से मिली रेलवे में नौकरी§ֆ:अंकिता ध्यानी को 2022 में स्पोर्ट्स कोटे के जरिए रेलवे में नौकरी मिली. वे इस समय मुंबई में कार्यरत हैं. बैंगलुरु में उन्होंने प्रशिक्षण लिया है. बता दें कि उत्तराखंड की बेटी अंकिता ध्यानी ने नौ मिनट 53.63 सेकेंड में तीन हजार मीटर की रेस पूरी कर स्वर्ण पदक जीता. जबकि मध्य प्रदेश की मंजू यादव ने 10 मिनट 15.7 सेकेंड के समय के साथ रजत और यूपी की रबी पाल ने कांस्य पदक जीता.
§֍:खेल मंत्री ने पहनाया मेडल§ֆ:
खेल मंत्री रेखा आर्या ने 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा में स्वर्ण पदक विजेता अंकिता ध्यानी और जूड़ों में स्वर्ण पदक जीतने वाले सिद्धार्थ रावत को मेडल पहनाए. मंत्री ने इन स्पर्धाओं में विजेता रहे अन्य खिलाडियों को भी सम्मानित किया. उन्होंने कहा, अंकिता से प्रदेश के लोगों को पहले ही गोल्ड की उम्मीद थी. मंत्री ने कहा, खिलाडियों ने इन खेलों में यह साबित कर दिया है कि अगर उन्हें सही सुविधाएं और प्रोत्साहन मिले तो वे कमाल कर सकते हैं. कहा, पदक तालिका में छठे या सातवें स्थान पर बने रहना हमारे लिए गौरव की बात है.
§उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों का आयोजन जारी है. इसी बीच सोमवार को उत्तराखंड की अंकिता ने 3000 मीटर स्टीपलचेज सपर्धा में सवर्ण पदक हासिल किया. अंकिता की दौड़ देख दर्शकों के होश उड़ गए. उन्होंने 10 हडार मीटर की रेस में रजत जीतने के बाद एथलेटिक्स में यह दूसरा पदक जीता. मूल रूप से पौड़ी जिले के जयहरीखाल के मेरुड गांव की रहने वाली अंकिता शुरूआत में करीब 200 मीटर तक चौथे स्थान पर दौड़ी, इसके बाद उन्होंने स्पर्धा में अन्य प्रदेशों की एथलीटों से अच्छी खासी बढ़त बना ली थी, जो अंतिम समय तक रखे रही और सभी को पछाड़ दिया. अंकिता के मुताबिक रेस की शुरूआत में चौथे स्थान पर रहना उसकी रणनीति का हिस्सा था. देश के अन्य राज्यों के एथलीटों को परखने के लिए उसने स्लो स्टेप लिए और फिर रेस तेज कर दी.

