֍: 12 महीने लगाई जा सकती है तुलसी की नई वैरायटी§ֆ:डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने बताया कि तुलसी की नई प्रजाति सरस्वती की सबसे अधिक खासियत ये है कि इसे 12 महीने तक लगाई जा सकती है. वहीं जेरेनियम की नई वेरायटी का उपयोग परफ्यूम और खुशबूदार साबुन बनाने वाली इंडस्ट्री में काफी होता है. इससे किसानों की आय में इजाफा होगा. उन्होंने बताया कि दो नई विकसित प्रजाति तुलसी और जेरेनियम की जानकारी किसानों को दी जाएगी.§֍:किसानों के लिए वरदान साबित होगी दोनों नई वैरायटी§ֆ:डॉ. त्रिवेदी बताते हैं कि सीएसआईआर-सीमैप पिछले 60 वर्षों से औषधीय एवं सगंध पौधों की खेती में किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है, तथा नई-नई कृषि तकनीकी, पौध सामग्री एवं उन्नतशील प्रजातियां किसानों को उपलब्ध करा रहा है जिसके फलस्वरूप लाखों किसानों को प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचा है. डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि तुलसी और जेरेनियम की नई वैरायटी किसानों के लिए आने वाले वक्त में वरदान साबित होगा.
§֍:जिरेनियम तेल के उत्पादन में देश बन सकता है आत्मनिर्भर§ֆ:सीमैप लखनऊ के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने किसानों से पारंपरिक खेती से इतर जिरेनियम और मेंथा की खेती को लाभप्रद बताया. उन्होंने कहा कि आज देश में जितनी खपत है, उसका मात्र 10 प्रतिशत ही जिरेनियम तेल का उत्पादन होता है. लगभग 90 प्रतिशत जिरेनियम तेल आयात किया जाता है. इसका बाजार भाव 15-20 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक है. सीमैप ने इसकी विभिन्न प्रजातियां विकसित की हैं. इनकी खेती से किसान लाभ कमाएंगे और जिरेनियम तेल के उत्पादन में देश आत्मनिर्भर बन सकता है.
§बाजार में औषधीय (Medicinal Plants) उत्पादों की मांग बढ़ गई है जो किसानों (Farmers) के लिए लाभकारी साबित हो रही है. इसी क्रम में सीएसआईआर-केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (CSIR-CIMAP) लखनऊ के वैज्ञानिकों ने बड़ी सफलता हासिल की है. संस्थान ने तुलसी और जेरेनियम की नई वैरायटी तैयार की है. इस तुलसी की नई वैरायटी का नाम ‘सरस्वती’ रखा गया है. इसके अलावा जेरेनियम की नई वेरायटी का नाम ‘संगम’ रखा गया है.

