֍:एक साल में दो बार होती है गर्भवती§ֆ:भेड़ की अविशान’ नस्ल की बात करें तो ये नस्ल 1997 में पश्चिमी बंगाल के सुंदरवन से गैरोल नस्ल की भेड़ मंगवाई गई. इसके बाद इस नस्ल को मालपुरा की भेड़ से क्रॉस करवाकर क्लोन तैयार किया गया. इस दौरान वैज्ञानिकों को कुछ खास सफलता नहीं मिली, क्योंकि क्रॉस कराने के बाद जो भेड़ की नस्ल आई, उसकी मृत्यु दर अधिक थी. साथ ही दूध देने की क्षमता भी कम थी. इसके बाद गुजरात के पाटनवाड़ी नस्ल की भेड़ से मालपुरा की भेड़ से क्रॉस करवाया गया. तब जाकर भेड़ों की उन्नत नस्ल “अविशान” का जन्म हुआ. यह साधारण नस्ल की भेड़ों के मुकाबले अधिक दूध देती है. §֍:
विशेषज्ञों ने दी जानकारी
§ֆ:पशु विशेषज्ञों का कहना है कि अविशान भेड़ के बच्चे का विकास अन्य नस्ल की भेड़ों के मुकाबले 30 फीसदी अधिक तेजी के साथ होता है. इसके मेमने जल्द ही जन्म के बाद बिक्री के लिए तैयार हो जाते हैं. उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में किसान बड़े स्तर पर अविशान की भेड़ का पालन कर रहे हैं. इसके मेमनों की मृत्यु दर महज 5 फीसदी ही है. अगर आप चाहें, तो 3 महीने के मेमनों को मांस के लिए बेच सकते हैं. एक मेमने से 2500 रुपये की कमाई होगी. इससे पशु पालकों को काफी मुनाफा होगा.§۩:Uploads/NewsImages/|§भारत में किसा अधिक आय के लिए पशु पालन कर रहे हैं. इसके लिए वैज्ञानिक भी नई नस्लों को कृषकों से अवगत करा रहे हैं. इसी के साथ डेयरी इंडस्ट्री में भेड़ की बढ़ती डिमांड को देखते हुए वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नस्ल साझा की है, जिससे किसानों को अत्यधिक लाभ मिलने की पूरी संभावना है. ऐसे में आइए आपको बताते हैं भेड़ की एक ऐसी नस्ल के बारे में जो किसानों के लिए फायदेमंद साबित होने वाली है. इस नस्ल का नाम हॉ ‘अविशान’.

